आयुर्वेद की आवश्यकता
आज के भौतिक युग में मनुष्य के जीवन में व्यस्तता, भागदौड़ और प्रतियोगिता के कारण हर व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक क्षेत्र में अत्यंत दबाव आने लगा है जिसके कारण मनुष्य विविध प्रकार के रोगों के संक्रमण में आ रहा है , अधिकतर लोग तो ऐसे भी देखने में आते हैं जिनके शरीर के हर अंग में कोई न कोई रोग जगह बना चुका है, हर रोग के अपने कारण हो सकते हैं लेकिन रोगों पर होने वाले हर शोध में हर रोग के मूल में लोगों की बिगड़ती भोजन शैली, रहन सहन, आचार विचार और बढ़ते तनाव ही पाया जाता है, और ऐसे में जब हर व्यक्ति एलोपेथिक डॉक्टरों के चक्कर काट काट कर महंगी दवाइयां और अनावश्यक टेस्ट, एलोपेथिक डाक्टर की महंगी फ़ीस , उसके बाद भी इलाज की कोई गारंटी नहीं होती तो एक आम आदमी गहरे तनाव में और ज्यादा गिरता चला जाता हैं,
उस समय आयुर्वेद ही उसे नजर आता है जो उसे बेहद असरदार और सुरक्षित तरीके से रोगमुक्त कर देता है, और इसका इलाज भी एलोपेथी से कहीं ज्यादा सस्ता रहता है,
१. आयुर्वेदिक जीवन शैली से मनुष्य जटिल से जटिल रोग से मुक्त हो सकता है जिसका अभी तक एलोपेथी में इलाज भी नहीं है।
२. लोगो को आयुर्वेदिक दवाइयों का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता ।
३. आयुर्वेद की ओषधियाँ रोग के मूल में जाकर रोग का निदान करती हैं।
४. आयुर्वेद अपनाने के बाद हमारे जीवन चर्या में संतुलन आ जाता है जिसके कारण आगे होने वाले रोगों से मनुष्य पहले ही बचना शरू कर देता है ।
५. आयुर्वेद में रोगी का इलाज कभी भी ज्यादा महंगा नहीं होता और बेहद कम खर्च में भी बड़े गंभीर रोगों का इलाज हो जाता है।
६. आयुर्वेद अपनाने से मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्थिति में बेहतर संतुलन आता है जिसके कारण उसका अपने दैनिक जीवन के कार्यों में एकाग्रता बढ़ जाती है
लेकिन उन एलोपेथिक दवाइयों क कारण मुझे मात्र ३० वर्ष की आयु में ही लो बीपी
रहने लगा था कफ की समस्या में भी कोई खास फायदा नहीं हुआ,
और डाक्टर की महंगी फ़ीस दे
देकर में अपनी सेलरी का बहुत बड़ा भाग इलाज में खर्च कर रहा था,
फिर मैंने पतंजलि आयुर्वेदिक
औषद्यालय में जाकर दिखाया जहा मेरा डॉक्टरी चेकअप एकदम फ्री हुआ सिर्फ दवाइयों के
पैसे लिए गए।
जो की १५ दिन के लिए दी गई थी और वही
दवाइयां मेरे घर क नजदीक के ही पतंजलि आयुर्वेदिक दवाई केंद्र पर उपलब्ध थी,
जिनके सेवन से पहले हफ्ते में
ही अत्यधिक लाभ नजर आने लगा था, और कुछ योग क्रियाएं साथ में करने से ही एक ही महीने में ही मेरा ब्रोंकाइटिस
लगभग खत्म हो गया था और दवाइयां भी बेहद सस्ती थीं।
उसके बाद मुझे ये अनुभव हुआ की यदि
में अपने देश के ही आयुर्वेद के द्वारा इतनी जल्दी रोग मुक्त हो सकता हूँ तो फिर
मुझे दूसरे रोगियों की भी सहयता करनी चाहिए जो अब तक एलोपेथिक इलाज करा क्र परेशान
हो रहे हैं, इसीलिए
में लोगों को आयुर्वेद के लाभ समझाने लगा और धीरे धीरे उन्हें अन्य रोगों के
आयुर्वेदिक निदान भी बताने लगा जिससे लोगों ने अत्यधिक लाभ उठाया,
और उसके बाद मुझे आयुर्वेद को
और बड़े स्तर पर प्रसार करने की आवश्यकता अनुभव हुई।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मैंने ये आयुर्वेदिक मित्र का ब्लॉग लिखना
शुरू किया ताकि इसके माध्यम से में ज्यादा से ज्यादा लोगों को आयुर्वेद के लाभ
पहुंचा सकूं।



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